मौलवी साहब

क्या बेटा क्या हाल है , जहां भी किसी से मिलता बिना मतलब के ही रिश्तेदारी जोड़ ही लेता है , और पूछ बैठता है , बेटा अब्बा कैसा है , नही तो क्या भैय्या भाभी कैसी हैं , मेरा सलाम बोलिएगा । एक बात तो है , ये आदमी को वाकई बहुत सारे लोग जानते हैं और ये भी , पता नहीं कितने दूर दूर तक के रिश्तेदार को जानते हैं । सब कुछ होते हुए भी कुछ न हो ऐसा देखने से तो लगता है  । 



पर लोगों को इसकी हरकत की वजह से लोग इन्हें मजाक - मजाक में सताने लगते हैं । दरअसल ये आदमी ही एक अलग सवभाव का है जिसका आप अंदाजा नहीं लगा  सकते हैं की अगले कुछ मिनटों में इसका मूड कैसा रहने वाला है ये किसी को पता नहीं । इसलिए लोग और भी  इन्हें ज्यादा परेशान करने लगते हैं । आदमी चाहे जैसा भी हो पर है बड़े काम का  । जैसे ही गर्मी की शुरुआत होती है इसकी चलती बढ़ जाती है । लोग इनकी खुशामत करते हैं , क्या मौलवी नय्यर साब कब फ्री हैं मेरा चारपाई कब बना के दीजिएगा और ये किसी को मना नहीं करते लोग पूछते हैं कितना सुतली और क्या सब लगेगा बता दीजिए और आप किस दिन  समय दे रहे हैं । ज्यादातर लोग इन्हें चौक चौराहे पे इस तरह का बात करते हुए देखे जाते हैं । जिन लोगों को इनके आदत के बारे में पता है वो सामने वाले को बोलते हैं , हो एक चाय और पान खिलाए न वो आज ही आपका चारपाई बना देगा , एक बात तो है ये बंदा चाहे कितना भी खाया हुआ क्यों न हो फिर भी इसे खाने का मन करता है ,खाने के मामले में कभी मना नहीं करता है, शायद कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें पेट में कम आंख में ज्यादा भूख होता है , लेकिन एक समय था जब ये तंदुरुस्त हुआ करता  था तब कोई इसे अपने यहां काम पे रखने मैं डरता था  । लोग इनको खिलाने से डरता था क्यों की ये  खाना को चबाने के बजाय निगल जाता था , और 4–5 आदमी का खाना अकेले खा जाता था जिससे लोग इसे अपने यहां काम पे रखने से पहले बहुत बार सोचता था कि रखें या नहीं । वक्त बदलते गया अब वो सेहत भी नही रहा पर कुछ नहीं गया तो उसकी वो कारीगरी जो आज भी बहुत गिने चुने लोगों को ही आता होगा । इसमें कोई शक नहीं काम पूरा ईमानदारी पूर्वक करता है बस काम करते समय कोई इसे कुछ ठेसा बात न कह दे क्यों की बात बात पे कूद जाने का आदत है । ऐ बेटा पान नहीं खिलाओगे , हां आप काम कीजिए ना कितना पान खाना है आपको , नही वैसे मजाक किए , बेटा थे इस लिए कहे । इस तरह का बात करना उनका एक साधारण सा आदत है । अगर उन्हें सब कुछ मिल गया तो फिर वो अपने काम में पूरी तरह मगन रहता है और कुछ न कुछ बकबक करते रहता है । रिश्तेदारी जोड़ने में माहिर आदमी है , कहीं का भी आदमी क्यों न हो वो उनसे ऐसे बात करता है लगता वो उनको पहले से ही जानता हो ये खूबी तो है इसके अंदर में । गांव में बहुत से लोग इन्हें मौलवी साब कह कर पुकारते हैं और बच्चे इसे मजाक में " बैम " कहता है । जैसे ही अगर कोई उन्हें मजाक में बैम बोल दिया समझो वो उसके घर फरयाद लेकर हाजिर हो जाता है । घर वालों के सामने अपने आप में बड़बड़ाने लगते हैं खूब गुस्से में आ जाता है और पता नही क्या -क्या बोलने लगता है । फिर अगर उसे कुछ खाने पीने को मिल जाए तो फौरन शांत भी हो जाता है। अक्सर हमलोग मजाक करते रहते हैं कभी कभा इतना न गाली बोलने लगता है जिससे मन करता है की इनको और सताया जाए । जो आदमी इसको एक बार परेशान कर दिया दोबारा वो लाख बुला के रहे ये जाने वाला नही है । हां अगर किसी चीज का लालच दे तो थोड़ा पिघल सकता है। समाज में ऐसे बहुत ही कम लोग हैं जो गिने चुने बचे हुए हैं । गांव मैं होते हैं कुछ लोग जो बच्चों का खिलौना होते हैं बच्चे ऐसे लोगों के साथ मजाक मस्ती करते हैं पर धीरे धीरे अब ऐसे लोगों कम होते जा रहे हैं । जमाना ही इतना बदल गया है कि न आजकल के बच्चों के पास उतना समय है और न ऐसे लोग बेगार बैठे हैं जो बच्चों के साथ बात करे । लोग एक अलग दुनिया मैं मगन है । हमारी पुरानी विरासत धीरे धीरे अब खत्म होता जा रहा है । पुराने लोगों मैं तरह तरह के अक्कासी हुआ करता था । किसी भी काम को बहुत करीने के साथ किया करता था , अब के लोगों मैं वैसी कोई बात नहीं रही न ही लोगों के पास समय है उन सब चीजों को सीखने का । 
कुछ दिन पहले मौलवी साहब की ली गई तस्वीर है । बेचारे बहुत मेहनती हैं ।
अपने काम में मगन रहता है । 

Abu Sufyan 
हमारी एक छोटी सी पहल और शुरुआत है कुछ लिखने की अगर कुछ गलती है तो आप लोग मार्गदर्शन दें। 

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